Friday, March 7, 2025

 

Aurangzeb Controversy: औरंगजेब का वो आखिरी खत जो खोल देगा महिमामंडन करने वालों का दिमाग, आप भी पढ़िये

Aurangzeb Controversy: औरंगजेब का वो आखिरी खत जिसका जिक्र इतिहास की किताबों में हुआ है वह औरंगजेब के पापों की कहानी खुद कहता है. विवादास्पद मुगल शासक मृत्यु से पहले पछतावे में अपने किये गुनाहों का जिक्र किया है. राम कुमार वर्मा की लिखी किताब 'औरंगजेब की आखिरी रात' के खत का मजमून आगे दिया गया है.

औरंगजेब का वो आखिरी खत जो खोल देगा महिमामंडन करने वालों का दिमाग, आप भी पढ़िये

औरंगजेब के जुल्म को दर्शाती तस्वीर (प्रतीकात्मक)

हाइलाइट्स

  • अबू आजमी के औरंगज़ेब महिमामंडन पर विवाद बढ़ा.
  • औरंगज़ेब ने गैर-मुसलमानों पर जज़िया कर लगाया.
  • औरंगज़ेब ने मरने से पहले अपने पापों का जिक्र किया.

पटना. देश की राजनीति में मुगल शासक औरंगजेब चर्चा में है और समाजवादी पार्टी के नेता अबू आजमी के इसके महिमामंडन करने की कोशिश को लेकर विवाद बढ़ गया है. इतिहास के पन्नों में देखें तो  विवादास्पद मुगल शासकों में सबसे बड़ा नाम औरंगजेब का है. औरंगजेब ने गैर-मुसलमानों पर जजिया कर जैसी भेदभावपूर्ण नीतियां लागू कीं. औरंगजेब ने सिखों के गुरु तेग बहादुर का सिर कलम करवा दिया था. उसने गुरु गोविंद सिंह के बेटों को जिंदा दीवार में चुनवा दिया, वहीं संभाजी महाराज की आंखें फोड़ दीं और नाखून उखाड़ लिए. इसके शासन काल में भारत में शरियत के आधार पर फतवा-ए-आलमगीरी लागू किया और बड़ी संख्या में हिंदू मंदिरों को नष्ट कर दिया गया. काशी और सोमनाथ मंदिरों को नष्ट करवाया और लाखों हिंदुओं की हत्या करवाई. इसकी क्रूरता के कारण करीब-करीब पूरे भारतीय उपमहादीप में मुगल साम्राज्य अपना सबसे ज्यादा विस्तार कर पाया. औरंगजेब की मृत्यु 1707 ईस्वी में हुई थी. कहा जाता है कि मौत से पहले इसको अपने किये गुनाहों पर पछतावा था और औरंगजेब ने अपने बेटों, आजम शाह और काम बख्श को अपने खेद व्यक्त करने के लिए पत्र लिखे थे. इन पत्रों में उसने अपने पापों और असफलताओं के बारे में जिक्र किया.

औरंगजेब ने अपने आखिरी पत्र में लिखा जो लिखा वह उसके पछतावे की कहानी कहता है. औरंगजेब ने मरने से पहले अपने बेटों को लिखी एक चिट्ठी में अपने पापों का जिक्र किया था. इस चिट्ठी में उन्होंने लिखा था कि उन्होंने लोगों का भला नहीं किया और उनका जीवन निरर्थक बीत गया. उन्होंने यह भी लिखा था कि उन्हें अपने पापों का परिणाम भुगतना होगा.

राम कुमार वर्मा की लिखी किताब ‘औरंगजेब की आखिरी रात’ में औरंगजेब के खत का मजमून कुछ यूं जिक्र किया गया है. ”अब मैं बूढ़ा और दुर्बल हो गया हूं.मैं नहीं जानता मैं कौन हूं और इस संसार में क्यों आया. मैंने लोगों का भला नहीं किया, मेरा जीवन ऐसे ही निरर्थक बीत गया. भविष्य को लेकर मुझे कोई उम्मीद नहीं है, मेरा बुखार अब उतर गया है, लेकिन ऐसा लग रहा है कि शरीर पर केवल चमड़ी हो. दुनिया में कुछ लेकर नहीं आया था, लेकिन अब पापों का भारी बोझ लेकर जा रहा हूं. मैं नहीं जानता कि अल्लाह मुझे क्या सजा देगा, मैंने लोगों को जितने भी दुख दिए हैं, वो हर पाप जो मुझसे हुआ है उसका परिणाम मुझे भुगतना होगा. बुराईयों में डूबा हुआ गुनाहगार हूं मैं.”

बता दें कि औरंगजेब के पिता शाहजहां थे. औरंगजेब ने अपने पिता पर भी काफी जुल्म किये थे. औरंगजेब ने अपने पिता शाहजहां को आगरा के किले में कैद करके रखा और उन्हें पानी के लिए तरसाया था. शाहजहां ने अपनी आत्मकथा ‘शाहजहांनामा’ में औरंगजेब के लिए बहुत कठोर शब्दों का प्रयोग किया था. शाहजहां ने लिखा कि खुदा करे कि ऐसी औलाद किसी के यहां पैदा ना हो. शाहजहां ने औरंगजेब की तुलना हिंदुओं से की, जो अपने माता-पिता की सेवा करते हैं और उनकी मृत्यु के बाद तर्पण करते हैं। उन्होंने लिखा है कि औरंगजेब से अच्छे तो हिंदू हैं, जो अपने माता-पिता की सेवा करते हैं और उनकी मृत्यु के बाद तर्पण करते हैं.

रामकुमार वर्मा की लिखी किताब ‘औरंगजेब की आखिरी रात’ का अंश

बता दें कि औरंगज़ेब अपने सम्राज्य को अपने पुत्रों में विभाजित कर देना चाहता था. वह उत्तराधिकार खत्म करना चाहता था, लेकिन उसकी यह इच्छा पूरी नहीं हो सकी. उनके बेटों के बीच भी सिंहासन के लिए यद्ध हुआ. उसके तीन बेटे मुहम्मद मुअज्जल, मुहम्मद आजम और कामबख़्श के मध्य उत्तराधिकार का युद्ध हुआ. युद्ध में उनका बड़ा पुत्र शाहजादा मुअज्जल जीता और उसने अपने भाई मुहम्मद आजम को 18 जून 1707 ईस्वी को जजाऊ में और कामबख़्श को हैदराबाद में जनवरी 1709 ईस्वी में मार डाला.

औरंगजेब के शासनकाल में मुगल साम्राज्य का विस्तार करीब-करीब पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में था.

बता दें कि औरंगजेब की मृत्यु 1707 ईस्वी में हुई थी. महाराष्ट्र के औरंगाबाद के निकट खुल्दाबाद नामक छोटे से गांव में जो औरंगजेब आलमगीर का मकबरा बनाया गया, उसमें उसे सीधे सादे तरीके से दफन किया गया. उसकी क़ब्र कच्ची मिटटी की बनाई गई, जिस पर आसमान के सिवाय कोई दूसरी छत नहीं रखी गई. कब्र के मुजाविर उसकी कब्र पर जब तब हरी दूब लगा देते हैं. इसी कच्चे मजार में पड़ा हुआ भारत का यह सम्राट प्रायश्चित की आग में जलते हुए आज भी परमात्मा से रूबरू होने के इंतजार में है.

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Thursday, March 6, 2025

Pakistan should return stolen Kashmir

 

Pakistan should return stolen Kashmir Jaishankar said all problems will end once PoK is returned चुराया हुआ कश्मीर वापस करे पाकिस्तान; जयशंकर बोले- PoK मिलते ही सारी समस्या खत्म, India Hindi News

6 मार्च 2025

चुराया हुआ कश्मीर वापस करे पाकिस्तान; जयशंकर बोले- PoK मिलते ही सारी समस्या खत्म

  • एस जयशंकर ने कश्मीर को लेकर भारत सरकार द्वारा उठाए गए कदमों, आर्थिक उपायों और उच्च मतदान प्रतिशत के साथ संपन्न हुए चुनावों का उल्लेख किया। उन्होंने पीओके का भी जिक्र किया।

चुराया हुआ कश्मीर वापस करे पाकिस्तान; जयशंकर बोले- PoK मिलते ही सारी समस्या खत्म

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बुधवार को लंदन के चथम हाउस थिंक टैंक में आयोजित एक सत्र "भारत की वृद्धि और दुनिया में भूमिका" में कश्मीर और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक परिप्रेक्ष्य में डॉलर के उपयोग पर अपने विचार रखे। इस दौरान उन्होंने कश्मीर को लेकर भारत सरकार द्वारा उठाए गए कदमों, आर्थिक उपायों और उच्च मतदान प्रतिशत के साथ संपन्न हुए चुनावों का उल्लेख किया। उन्होंने पीओके का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अब भारत को इसी का इंतजार है, जो चोरी से पाकिस्तान ने अपने पास रखा है।

कश्मीर पर पूछे गए सवाल के जवाब में जयशंकर ने कहा, "कश्मीर में हमने अधिकांश समस्याओं का समाधान किया है। मुझे लगता है कि अनुच्छेद 370 को हटाना एक पहला कदम था। इसके बाद कश्मीर में विकास, आर्थिक गतिविधि और सामाजिक न्याय की बहाली दूसरा कदम था। तीसरा कदम था चुनावों का आयोजन, जिसमें बहुत उच्च मतदान हुआ। मुझे लगता है कि हम जिस चीज का इंतजार कर रहे हैं, वह कश्मीर का चुराया हुआ हिस्सा वापस मिलना है। व हिस्सा फिलहाल पाकिस्तान के अवैध कब्जे में है। जब यह हो जाएगा तो मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कश्मीर की समस्या का समाधान हो जाएगा।"

भारत के हित में ट्रंप

जयशंकर ने यह भी कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शासन में अमेरिकी प्रशासन बहुध्रुवीयता की ओर बढ़ रहा है, जो भारत के हितों के अनुकूल है। उन्होंने कहा, "हम राष्ट्रपति और प्रशासन को देख रहे हैं जो हमारी भाषा में बहुध्रुवीयता की दिशा में बढ़ रहे हैं और यह भारत के लिए अनुकूल है।"
टैरिफ के बारे में बात करते हुए जयशंकर ने कहा कि वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल वर्तमान में वाशिंगटन में हैं, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच व्हाइट हाउस में हुई बातचीत के बाद द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर चर्चा हो रही है। उन्होंने कहा, "हमने इस पर एक बहुत खुली बातचीत की और उस बातचीत का परिणाम यह था कि हम दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते की आवश्यकता पर सहमत हुए।"
जयशंकर ने चीन के साथ भारत के रिश्तों, रुपये के अंतरराष्ट्रीयकरण और वैश्विक अर्थव्यवस्था में डॉलर की भूमिका पर भी विचार व्यक्त किए। चीन के संदर्भ में उन्होंने अक्टूबर 2024 के बाद हुई कुछ घटनाओं का जिक्र किया, जिसमें तिब्बत में कैलाश पर्वत यात्रा मार्ग का उद्घाटन भी शामिल था। उन्होंने कहा, "हमारा चीन के साथ एक बहुत ही अद्वितीय रिश्ता है, क्योंकि हम दोनों ही दुनिया के एकमात्र दो ऐसे देश हैं जिनकी जनसंख्या दो बिलियन से अधिक । हम एक ऐसा रिश्ता चाहते हैं जिसमें हमारे हितों का सम्मान किया जाए, संवेदनशीलताओं को पहचाना जाए और यह दोनों के लिए काम करे।"
PoK S Jaishankar India Pakistan
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'टैरिफ वार पर भी बोले जयशंकर

चीन के साथ संबंध पर क्या बोले जयशंकर?


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