फ्लाइट की टिकट बुक कराने से लेकर प्रॉपर्टी खरीदने तक... दुबई में क्रिप्टोकरेंसी मचा रही धमाल, क्या है यूएई का प्लान?
राजेश भारती
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नई दिल्ली: हमारे देश में जहां क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) अभी भी चलन में नहीं है, वहीं दुबई में यह धमाल मचा रही है। लोग इसका इस्तेमाल फ्लाइट की टिकट बुक कराने से लेकर प्रॉपर्टी खरीदने तक में कर रहे हैं। इस समय दुबई में क्रिप्टोकरेंसी खास जगह बना रही है। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) टैक्स में छूट और निवेशकों के लिए अच्छे माहौल के कारण क्रिप्टो का केंद्र बन रहा है।
दुबई में हाल ही में दो बड़े फैसले हुए हैं। एमिरेट्स एयरलाइंस (Emirates Airlines) ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके तहत अब फ्लाइट की टिकट क्रिप्टो से बुक हो सकेंगी। दुबई लैंड डिपार्टमेंट (DLD) ने भी एक क्रिप्टो प्लेटफॉर्म के साथ साझेदारी की है। इससे प्रॉपर्टी के सौदे ब्लॉकचेन तकनीक से हो सकेंगे। ये सब एक बड़े बदलाव का हिस्सा है। साल 2025 की शुरुआत में क्रिप्टो बाजार 3 लाख करोड़ डॉलर से ज्यादा का हो गया। लोग अब रोजमर्रा के कामों में भी क्रिप्टो का इस्तेमाल कर रहे हैं। दुबई सरकार और प्राइवेट कंपनियां मिलकर इस मांग को पूरा कर रही हैं। क्या 500 रुपये का नोट भी होने वाला है बंद? लोगों में पैदा हुआ कंफ्यूजन, जानें वायरल मैसेज की सच्चाई
दुबई में ये क्रिप्टोकरेंसी चलन में
दुबई में कुछ खास क्रिप्टो करेंसी इस्तेमाल होती हैं। इनमें बिटकॉइन (BTC), इथेरियम (ETH), टेथर (USDT) और यूएसडी कॉइन (USDC) प्रमुख हैं।
यूएई में क्रिप्टो को क्यों किया जा रहा इतना पसंद?
यूएई में क्रिप्टो रखने पर कोई टैक्स नहीं लगता। इसका मतलब है कि क्रिप्टो को बेचने, लगाने या माइनिंग करने से होने वाले मुनाफे पर कोई टैक्स नहीं है। यह निवेशकों के लिए बहुत अच्छी बात है।
दुबई स्मार्ट सिटी बनना चाहता है। यहां ब्लॉकचेन (Blockchain) को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। इसलिए निवेश के नजरिए से क्रिप्टो के लिए यहां अच्छा माहौल है।
क्रिप्टो से दुनिया भर के निवेशक यूएई की अर्थव्यवस्था में आसानी से हिस्सा ले सकते हैं। उन्हें बैंक और करेंसी बदलने का झंझट नहीं होता।
एमिरेट्स एयरलाइन ने किया समझौता
9 जुलाई 2025 को एमिरेट्स ने एक बड़े क्रिप्टो प्लेटफॉर्म के साथ समझौता किया। अब एमिरेट्स की टिकटें क्रिप्टो से खरीदी जा सकेंगी। यह सिस्टम अगले साल शुरू हो जाएगा। ग्राहक बिटकॉइन और इथेरियम जैसी क्रिप्टोकरेंसी से टिकट खरीद पाएंगे।शेख अहमद बिन सईद अल मकतूम की मौजूदगी में यह समझौता हुआ। एमिरेट्स का कहना है कि वह युवा और तकनीक पसंद करने वाले ग्राहकों को ध्यान में रखकर यह कदम उठा रही है। एमिरेट्स के डिप्टी प्रेसिडेंट अदनान काजिम ने कहा कि इससे ग्राहकों को ज्यादा सुविधा मिलेगी। साथ ही यह पेमेंट के नए तरीकों को अपनाने की दिशा में भी एक कदम है।
प्रॉपर्टी में भी क्रिप्टो का इस्तेमाल
जुलाई 2025 में दुबई लैंड डिपार्टमेंट (DLD) ने एक समझौता किया। इससे प्रॉपर्टी को खरीदने, बेचने और रिकॉर्ड करने का तरीका बदल जाएगा। यह दिखाता है कि क्रिप्टो को अब सरकार भी बढ़ावा दे रही है।
इस समझौते के तहत DLD और कंपनी मिलकर रियल एस्टेट के लिए एक सुरक्षित डिजिटल माहौल बनाएंगे। इसमें क्रिप्टो से प्रॉपर्टी खरीदना, निवेशकों की पहचान करना और प्रॉपर्टी को टोकन में बदलना शामिल है। टोकन से प्रॉपर्टी को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर बेचा जा सकता है।
यह पहल दुबई रियल एस्टेट स्ट्रेटेजी 2033 का हिस्सा है। इसका लक्ष्य है कि रियल एस्टेट के लेनदेन 1 ट्रिलियन AED (करीब 272 अरब डॉलर) तक पहुंच जाएं। क्रिप्टो को एक जरिया माना जा रहा है। इससे दुनिया भर के निवेशकों को आकर्षित किया जा सकता है। खासकर वे निवेशक जो डिजिटल फाइनेंस में काम कर रहे हैं। कई बड़े डेवलपर्स ने पहले ही क्रिप्टो पेमेंट लेना शुरू कर दिया है।
दुबई बनेगा क्रिप्टो हब
यह कदम दुबई के क्रिप्टो हब बनने के सपने को पूरा करने में मदद करेगा। यहां न सिर्फ निवेश, बल्कि रोजमर्रा की चीजें भी क्रिप्टो से खरीदी जा सकेंगी। यह उस भविष्य की ओर एक और कदम है, जहां क्रिप्टो सिर्फ रखने की चीज नहीं रहेगी, बल्कि इस्तेमाल भी होगी।
लेखक के बारे मेंराजेश भारतीराजेश भारती, नवभारतटाइम्स ऑनलाइन में असिस्टेंट न्यूज़ एडिटर के तौर पर बिजनेस की खबरों को कवर करते हैं। उन्हें पत्रकारिता में करीब 15 वर्षों का अनुभव है। इससे पहले वह नवभारत टाइम्स अखबार में 5 साल से ज्यादा काम कर चुके हैं। वहां राजेश भारती ने विभिन्न विषयों जैसे- पर्सनल फाइनेंस, इंश्योरेंस, शेयर मार्केट, टेक, गैजेट्स, हेल्थ, एजुकेशन आदि पर फीचर स्टोरी लिखी हैं। नवभारत टाइम्स अखबार में काम करने से पहले इन्होंने दैनिक भास्कर, लोकमत जैसे अखबारों में रिपोर्टिंग और डेस्क, दोनों जगह काम किया है। राजेश भारती को ऑनलाइन के साथ प्रिंट का भी अनुभव है। वह भोपाल, इंदौर, औरंगाबाद (महाराष्ट्र) और रायपुर में काम कर चुके हैं। औरंगाबाद (महाराष्ट्र) में ऑल इंडिया रेडियो के लिए भी काम किया है।... और पढ़ें
₹1 करोड़ का हुआ एक BitCoin, 'क्रिप्टो वीक' के पहले दिन नई ऊंचाई पर, चांदी और Google भी छूटे पीछे
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बिटकॉइन की तेजी ने इसे मार्केट कैप के हिसाब से सिल्वर और गूगल से आगे कर दिया और अब यह दुनिया का छठा सबसे बड़ा एसेट है।
BitCoin jumps to Record High: अमेरिकी 'क्रिप्टो वीक' से पहले बिटकॉइन की चमक तेजी से बढ़ रही है। मार्केट कैप के हिसाब से दुनिया के सबसे बड़े क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन के भाव उछलकर $1.21 लाख के पार पहुंच गए। भारतीय करेंसी रुपये में बात करें तो पहली बार बिटकॉइन 1 करोड़ के पार पहुंचा है। कॉइनमार्केटकैप पर मौजूद डिटेल्स के मुताबिक फिलहाल यह 3.68% की तेजी के साथ $1,22,291.69 पर है। कारोबार के दौराम आज यह $1,22,540.92 के रिकॉर्ड हाई तक पहुंचा था। सात दिनों में इसमें 12% से अधिक तेजी आई है। इस क्रिप्टो मार्केट को ट्रंप के सपोर्ट, क्रिप्टो ईटीएफ में मजबूत निवेश और कॉरपोरेट ट्रेजरी के बढ़ते आवंटन से सपोर्ट मिला है।
चांदी और गूगल से आगे निकला BitCoin
बिटकॉइन की तेजी ने इसे मार्केट कैप के हिसाब से सिल्वर और गूगल से आगे कर दिया और अब यह दुनिया का छठा सबसे बड़ा एसेट है। बिटकॉइन का मार्केट कैप $2.4 ट्रिलियन यानी $2.4 लाख करोड़ है जबकि गूगल का मार्केट कैप $2.19 ट्रिलियन है। मार्केट कैप के हिसाब से टॉप एसेट गोल्ड है। BuyUcoin के सीईओ शिवम ठकराल के मुताबिक आज से शुरू हो रहे 'क्रिप्टो वीक' ने बिटकॉइन में तगड़ी चाबी भरी है जिसके चलते यह नई ऊंचाई पर पहुंचा है।
Crypto Week क्या है?
अमेरिका ने 3 जुलाई को ऐलान किया था कि 14 जुलाई से शुरू होने वाला सफ्ताह क्रिप्टो वीक होगा। अमेरिका को दुनिया की क्रिप्टो कैपिटल बनाने के लक्ष्य के तहत क्लेरिटी एक्ट (CLARITY Act), जीनियस एक्ट (GENIUS Act) और एंटी-सीबीडीसी सर्विलांस एक्ट जैसे अहम बिल पर चर्चा होगी। ये बिल क्रिप्टो से जुड़ी नियामकीय भूमिकाओं को स्पष्ट करने, स्टेबलकॉइन्स को ऑथराइज करने और अमेरिका के सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) को रोकने के उद्देश्य से लाए जा रहे हैं। कॉइनस्विच मार्केट्स डेस्क के मुताबिक इससे क्रिप्टो मार्केट में इंस्टीट्यूशंस की हिस्सेदारी बढ़ सकती है।
एवा लैब्स की रीजनल हेड देविका मित्तल का कहना है कि ये बिल काफी अच्छे समय पर आ रहें हैं क्योंकि वियतनाम जैसे देश भी क्रिप्टो को अपनाना शुरू कर रहे हैं। बड़ी-बड़ी कंपनियां अब तक स्पष्ट नियमों के इंतजार में इससे दूर थे, लेकिन अब क्रिप्टो वीक में पेश किए जाने वाले बिल से उन्हें क्रिप्टो में निवेश को लेकर भरोसा आ सकता है। हालांकि इन बिल्स (विधेयकों) का उद्देश्य क्रिप्टो मार्केट में बड़े निवेशकों को आकर्षित करने का ही नहीं, बल्कि आम निवेशकों को धोखाधड़ी और गलत तरीकों से बचाने का भी है।
डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि क्रिप्टो मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।
भारतीय नौसेना का नया युद्धपोत, आईएनएस अर्णाला क्यों है ख़ास?- बीबीसी की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट - BBC News हिंदी
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नौसेना के नए युद्धपोत, आईएनएस 'अर्णाला' में क्या है ख़ास?
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इमेज कैप्शन, इस युद्धपोत को हाल ही में विशाखापट्टनम में आयोजित एक समारोह में नौसेना ने अपने बेड़े में शामिल किया है
Author, जुगल पुरोहित
पदनाम, बीबीसी संवाददाता, विशाखापट्टनम से
इंडियन नेवी शिप (आईएनएस) अर्णाला, भारत का नया अत्याधुनिक स्वदेशी युद्धपोत है. पनडुब्बी मारक क्षमताओं से लैस इस युद्धपोत ने भारतीय नौसेना में एक अहम कड़ी जोड़ी है.
बीबीसी हिंदी को इस जहाज़ से ख़ास रिपोर्ट करने की इजाज़त मिली. हालाँकि, सुरक्षा कारणों से जहाज़ के कुछ हिस्सों में जाने की इजाज़त नहीं थी. हमने समझने की कोशिश की है कि समुद्री सुरक्षा के मामले में यह स्वदेशी युद्धपोत क्यों महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने जा रहा है?
आँकड़े बताते हैं कि भारत की 95 फ़ीसदी के आसपास अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक आवाजाही समुद्री मार्गों से होती है.
इन रास्तों में अरब सागर, बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर के समुद्री क्षेत्र शामिल हैं. यही नहीं, इन इलाक़ों में वैश्विक प्रतिस्पर्धा भी तेज़ हो रही है. इससे पता चलता है कि भारत की अर्थव्यवस्था किस हद तक समुद्री मार्ग पर निर्भर है.
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इमेज कैप्शन, समुद्री मार्गों की सुरक्षा भारत की अर्थव्यवस्था के लिए अहम है
सुरक्षा के लिहाज़ से देखें तो भारत के समुद्र तट की लंबाई 11 हज़ार किलोमीटर से ज़्यादा है. इस पूरे क्षेत्र में 200 से ज़्यादा बंदरगाह और कई तटीय शहर मौजूद हैं.
साथ ही, हिंद महासागर क्षेत्र में चीन और पाकिस्तान जैसे देशों के बढ़ते नौसैनिक प्रभाव ने भी भारत के लिए समुद्री रणनीति को और अधिक अहम बना दिया है.
इन सबको देखते हुए भारत भी अपनी पनडुब्बियों की संख्या और नौसेना की क्षमता बढ़ा रहा है. इसी रणनीतिक ज़रूरत के तहत भारतीय नौसेना ने हाल ही में आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में आयोजित एक समारोह में आईएनएस अर्णाला को अपने बेड़े में शामिल किया.
आईएनएस अर्णाला की ख़ासियत क्या है?
इमेज कैप्शन, बीबीसी संवाददाता जुगल पुरोहित और शाद मिद्हत को नौसेना ने आईएनएस अर्णाला का दौरा करने और रिपोर्टिंग की इजाज़त दी
आईएनएस अर्णाला भारत का सबसे नया पनडुब्बी-रोधी (एंटी-सबमरीन) युद्धपोत है. यह युद्धपोत कई मायनों में ख़ास है. इसकी सबसे बड़ी ख़ासियत है कि यह समुद्र में कम गहराई वाले यानी तट के आसपास के इलाक़ों में भी दुश्मन की पनडुब्बियों को ढूँढ सकता है.
आईएनएस अर्णाला जैसे युद्धपोत की नौसेना को कितनी ज़रूरत है, यह इस बात से भी समझा जा सकता है कि आने वाले कुछ साल में इस तरह के पंद्रह और युद्धपोत नौसेना के बेड़े में शामिल किए जाएँगे.
रक्षा मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक़, 16 जहाज़ों के इस प्रोजेक्ट की कुल लागत बारह हज़ार करोड़ रुपए से ज़्यादा है.
इन जहाज़ों को कोलकाता के गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (जीआरएसई शिपयार्ड) और कोच्चि के कोचीन शिपयार्ड में 'पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप' के तहत बनाया जा रहा है.
इमेज कैप्शन, इस युद्धपोत में तैनात सौ से अधिक अफ़सरों और जवानों के लिए खाने की सुविधा है
जिस दिन बीबीसी हिंदी की टीम आईएनएस अर्णाला पर पहुँची, इस पर तैनात नौसेना के अफ़सरों और जवानों के लिए यह एक सामान्य दिन था. युद्धपोत पर तरह-तरह के सामान लाए जा रहे थे. इस हलचल और शोर के बीच हम आईएनएस अर्णाला के अंदर गए.
एक युद्धपोत में अलग-अलग तरह के सेंसर, हथियार, इंजन और संपर्क के साधन वग़ैरह होते हैं. इसलिए इसके अंदर चलने-फिरने के लिए ज़्यादा जगह नहीं होती है. हमने आईएनएस अर्णाला में भी यही देखा.
अर्णाला के अंदर छह मंज़िलें हैं और सीढ़ियों की मदद से लोग ऊपर-नीचे जाते हैं.
क्या कहते हैं आईएनएस अर्णाला के कमांडिंग ऑफ़िसर?
इमेज कैप्शन, कमांडर अंकित ग्रोवर आईएनएस अर्णाला के कमांडिंग ऑफ़िसर हैं
दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने के लिए इस युद्धपोत में कई तरह के 'सोनार सिस्टम' लगे हैं. 'सोनार' का मतलब है, साउंड नेविगेशन एंड रेंजिंग.
यह एक ख़ास तकनीक है. इसके ज़रिए ध्वनि की तरंगों की मदद से पानी के अंदर मौजूद पनडुब्बियों का पता लगाया जा सकता है. यह इसलिए काफ़ी अहम है क्योंकि दुश्मन की पनडुब्बी कहाँ मौजूद है, यह पता लगाने के बाद ही उस पर हमला किया जा सकता है.
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इमेज कैप्शन, सोनार सिस्टम
इस पनडुब्बी-रोधी युद्धपोत की मारक क्षमता के बारे में समझने के लिए हमने आईएनएस अर्णाला के कैप्टन या कमांडिंग ऑफ़िसर, कमांडर अंकित ग्रोवर से बात की.
उन्होंने बताया, "इसमें हमारे पास कई प्रकार के एंटी-सबमरीन हथियार हैं. इसमें स्वदेशी रॉकेट लॉन्चर हैं. ये सबमरीन पर रॉकेट से हमला करते हैं."
"इस शिप में टारपीडो ट्यूब्स हैं जहाँ से सबमरीन पर टारपीडो फ़ायर किए जाएँगे. हमारे पास 'एंटी-टारपीडो डिकॉय सिस्टम' भी हैं. अगर इस युद्धपोत पर दुश्मन की पनडुब्बी ने टारपीडो फ़ायर किया तो उससे बचने में यह सिस्टम हमारे काम आएगा."
इमेज कैप्शन, आईएनएस अर्णाला का स्वदेशी रॉकेट लॉन्चर
अर्णाला में और क्या-क्या है?
यह युद्धपोत 77 मीटर लंबा यानी लगभग एक 26 मंज़िला इमारत की ऊँचाई के बराबर है.
नौसेना के मुताबिक़, इसमें 30 मिलीमीटर की सर्फ़ेस गन है. यह सतह और हवा से होने वाले हमलों के ख़िलाफ़ जवाबी कार्रवाई करने में सक्षम है.
आख़िर में, इसमें सुरंग बिछाने की क्षमता भी है. इससे दुश्मन की पनडुब्बी पर वार किया जा सकता है.
इमेज कैप्शन, नेवल सर्फे़स गन
आईएनएस अर्णाला की एक और ख़ासियत है- उसका इंजन.
नौसेना के मुताबिक़, डीजल इंजन और वॉटरजेट तकनीक से चलने वाला यह सबसे बड़ा युद्धपोत है.
बीबीसी की टीम ने इसके इंजन रूम को क़रीब से देखा. यहाँ हमारी मुलाक़ात मुलायम सिंह से हुई. वह आईएनएस अर्णाला के क्रू का हिस्सा हैं और इंजन रूम का काम देखते हैं.
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इमेज कैप्शन, यह युद्धपोत डीजल इंजन और वॉटरजेट तकनीक से चलता है
उनके मुताबिक़, "इस इंजन के तीन फ़ायदे हैं. सबसे पहले तो ऐसे इंजन से इस युद्धपोत को तेज़ गति मिलती है. यह इंजन युद्धपोत की दिशा आसानी से बदलने में भी मदद करता है और तीसरी बात, इससे आवाज़ कम होती है."
"मतलब, अगर दुश्मन की कोई पनडुब्बी आसपास हो तो वह आईएनएस अर्णाला के शांत इंजन की वजह से इसे आसानी से नहीं पकड़ पाएगी. इसके उलट यह युद्धपोत दुश्मन की पनडुब्बी पर पहले वार कर सकता है."
इमेज कैप्शन, मुलायम सिंह आईएनएस अर्णाला के क्रू का हिस्सा हैं
इस युद्धपोत पर 100 से अधिक अफ़सर और जवान तैनात हैं.
बीबीसी हिंदी ने देखा कि इनके लिए युद्धपोत पर रहने, खाने-पीने और मनोरंजन की सुविधाएँ कैसी हैं.
कोमोडोर रजनीश शर्मा नौसेना के वरिष्ठ अधिकारी हैं. वह नौसेना के आंध्र प्रदेश रीज़न के प्रभारी हैं.
विशाखापट्टनम में बीबीसी की टीम से मुलाक़ात के दौरान उन्होंने बताया, "आगे चल कर इन 16 जहाज़ों में से पश्चिमी तट पर आठ और पूर्वी तट पर आठ जहाज़ तैनात किए जाएँगे."
"दरअसल ये जहाज़ हमें पानी के भीतर बेहतर तरीक़े से निगरानी करने और दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने में ज़बरदस्त क्षमता देते हैं. यह एक ऐसी क्षमता है जो तटीय इलाक़ों में हमारे पास आसानी से मौजूद नहीं थी."
'अर्णाला' नाम के पीछे की कहानी क्या है?
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इमेज कैप्शन, आईएनएस अर्णाला जैसे पंद्रह और युद्धपोत नौसेना में 2029 तक शामिल किए जाएँगे
हालाँकि, हमने अर्णाला युद्धपोत को विशाखापट्टनम में देखा लेकिन उसके तार देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के वसई इलाक़े से भी जुड़े हैं. वसई के पास के तट पर एक क़िला है. इसका नाम अर्णाला है.
नौसेना के मुताबिक़, यह क़िला मराठा साम्राज्य के दौरान साल 1737 में दुश्मन के हमले रोकने के लिए बनाया गया था.
दरअसल, नौसेना में पहले भी अर्णाला नाम का युद्धपोत था लेकिन इसे कई साल पहले डीकमीशन कर दिया गया था.
चीन और पाकिस्तान की नौसेना क्षमता कितनी है?
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इमेज कैप्शन, अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के मुताबिक़, चीनी नौसेना दुनिया की सबसे बड़ी नौसेना है
पिछले साल अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने अपनी एक रिपोर्ट में चीन की नौसेना को दुनिया की सबसे बड़ी नौसेना बताया था. उस रिपोर्ट के मुताबिक़, चीन के पास 370 से अधिक युद्धपोत और पनडुब्बियाँ हैं.
उसी रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि पाकिस्तान की नौसेना की ताक़त बढ़ाने में चीन की बड़ी भूमिका है.
साल 2015 में पाकिस्तान ने चीन से आठ पनडुब्बी ख़रीदने का सौदा किया था. इनकी कुल क़ीमत तीन अरब अमेरिकी डॉलर से ज़्यादा की बताई जाती है.
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इमेज कैप्शन, भारत 12 हज़ार करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट के तहत आईएनएस अर्णाला जैसे जहाज़ों को बना रहा हैं
दिसंबर 2024 में भारतीय नौसेना अध्यक्ष एडमिरल दिनेश त्रिपाठी ने भी पाकिस्तान की नौसेना की क्षमताओं पर हैरानी जताई थी.
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस सूरत में भारत के लिए आईएनएस अर्णाला जैसे युद्धपोत एक बेहद ज़रूरी भूमिका निभाएँगे.
क्या कहते हैं जानकार
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इमेज कैप्शन, जानकार बताते हैं कि पनडुब्बियों का ख़तरा भारत जैसे देशों के सामने बना रहेगा और आने वाले समय में यह बढ़ भी सकता है (सांकेतिक तस्वीर)
बीबीसी हिंदी ने नौसेना में हेलीकॉप्टर पायलट रह चुके और पनडुब्बी-रोधी रणनीति के जानकार कैप्टन (रिटायर्ड) सरबजीत एस. परमार से बात की.
उन्होंने बताया, "साल 1971 के युद्ध में पाकिस्तान की ग़ाज़ी पनडुब्बी विशाखापट्टनम बंदरगाह के ठीक बाहर पाई गई थी. यह दिखाता है कि अतीत में और शायद भविष्य के संघर्षों में भी बंदरगाहों और जहाज़ों को दुश्मन की पनडुब्बियाँ निशाना बना सकती हैं."
उनके मुताबिक़ पनडुब्बियों के ख़िलाफ़ जंग, सबसे जटिल युद्ध में से एक है.
वह कहते हैं, ''आपके तट के पास दुश्मन की पनडुब्बी की मौजूदगी का मतलब है कि बेड़े को आगे बढ़ने से पहले उसे उस ख़तरे से निपटना होगा. यह बेड़े की गतिविधियों को प्रभावित करेगा. दुश्मन पर हमला करने के लिए उस बेड़े को बाहर जाने में मुश्किलें पैदा होंगी. यहाँ तक कि बंदरगाहों और मालवाहक जहाज़ों की आवाजाही पर भी असर पड़ेगा.''
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इमेज कैप्शन, पिछले साल अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया था कि पाकिस्तान की नौसेना की ताक़त बढ़ाने में चीन की बड़ी भूमिका है (सांकेतिक तस्वीर)
कैप्टन (रिटायर्ड) सरबजीत कहते हैं, ''लेकिन जब आपके पास एक समर्पित पनडुब्बी-रोधी युद्धपोत है, जैसे कि अर्णाला.. तो इसका मतलब है कि बड़े जहाज़ों को रोके बिना यह जहाज़ दुश्मन की पनडुब्बियों को ढूंढकर नष्ट कर सकता है.''
उनके मुताबिक़, ''यह बेड़े, ख़ास तौर से बड़े जहाज़ों को उनके मिशन के लिए आज़ाद करेगा. इसकी मौजूदगी बंदरगाहों को भी चालू रखेगी. हालाँकि, नौसेना ने ऐसे 16 जहाज़ों का ऑर्डर दिया है. यह नौसेना के एक साथ दिए गए बड़े ऑर्डरों में से एक है. नौसेना को इस तरह के जहाज़ों का उत्पादन जारी रखने चाहिए. साथ ही, हर समय इनकी मौजूदगी सुनिश्चित करनी चाहिए.''
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित